NBCC Green View के असुरक्षित टावरों को गिराने की मिली मंजूरी, जानें क्या है सुरक्षा गाइडलाइंस
आईआईटी दिल्ली और रुड़की द्वारा किए गए स्ट्रक्चरल ऑडिट में इस प्रोजेक्ट को रहने के लिए असुरक्षित पाया गया था। साल 2022 में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने इसे खाली करने के आदेश दिए थे।

NBCC Green View : सेक्टर-37D में स्थित एनबीसीसी (NBCC) ग्रीन व्यू प्रोजेक्ट के भविष्य को लेकर लंबे समय से चला आ रहा संशय अब खत्म हो गया है। गुरुग्राम के उपायुक्त (DC) अजय कुमार ने सोसायटी के शेष बचे असुरक्षित टावरों और ढांचों को गिराने की औपचारिक अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद अब टावर-ए, बी, सी और डी समेत सभी जर्जर संरचनाओं को चरणबद्ध तरीके से ढहाया जाएगा।
प्रशासन द्वारा जारी आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि डिमोलीशन (ध्वस्तीकरण) की यह प्रक्रिया बेहद सख्त सुरक्षा मानकों के तहत पूरी की जाएगी। एनबीसीसी को निर्देश दिए गए हैं कि कार्य शुरू करने से पहले और उसके दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दमकल विभाग, आपदा प्रबंधन सेल और पुलिस प्रशासन सहित सभी संबंधित विभागों की गाइडलाइंस का कड़ाई से पालन करना होगा।

प्रशासन ने यह भी साफ कर दिया है कि यदि इस प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही या दुर्घटना होती है, तो इसकी पूरी जवाबदेही एनबीसीसी इंडिया लिमिटेड की होगी। कंपनी को हर 15 दिन में अपनी अनुपालन रिपोर्ट प्रशासन को सौंपनी होगी।
आईआईटी दिल्ली और रुड़की द्वारा किए गए स्ट्रक्चरल ऑडिट में इस प्रोजेक्ट को रहने के लिए असुरक्षित पाया गया था। साल 2022 में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने इसे खाली करने के आदेश दिए थे। जांच में सामने आया था कि निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ था, जिसके बाद निर्माण करने वाली दो कंपनियों को ब्लैकलिस्ट भी किया जा चुका है।

इस प्रोजेक्ट में कुल 700 से अधिक फ्लैट थे, जिनमें से लगभग 255 फ्लैट्स की बिक्री हुई थी। आवंटियों के बीच आम सहमति बनाने के लिए लंबे समय तक बैठकों का दौर चला। ताजा आंकड़ों के अनुसार 160 खरीदारों ने अपने पैसे वापस (रिफंड) लेने का विकल्प चुना है। 78 खरीदारों ने उसी स्थान पर नए सिरे से होने वाले पुनर्निर्माण पर सहमति जताई है। ईडब्ल्यूएस (EWS) श्रेणी के अधिकांश आवंटियों ने दोबारा घर मिलने की उम्मीद जताई है।
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग (DTCP) ने इस प्रोजेक्ट का लाइसेंस मई 2027 तक बढ़ा दिया है। एनबीसीसी का कहना है कि एक बार जर्जर ढांचों को पूरी तरह हटा दिए जाने के बाद ही नए सिरे से निर्माण कार्य शुरू हो पाएगा। पिछले तीन वर्षों से अधर में लटके इस प्रोजेक्ट के लिए प्रशासन की यह मंजूरी एक बड़ी राहत मानी जा रही है।
डीटीपीई (DTCP) अमित मधोलिया ने पुष्टि की है कि उपायुक्त के निर्देशानुसार विभिन्न शर्तों के साथ एनबीसीसी को अनुमति पत्र जारी कर दिया गया है। अब जल्द ही मौके पर मशीनें और मजदूर डिमोलीशन की प्रक्रिया को अंजाम देते नजर आएंगे।











